का सरल उत्तर
'यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्ण्वर्कपद्मजान्...' अर्थ: जैसे मैं शिव, विष्णु, सूर्य और ब्रह्मा में कोई भेद नहीं देखता — वैसे ही विश्वात्मा शंकर (जो कल्याण करे = शं कल्याणं करोति) सदा मेरे लिए कल्याणकारी हों।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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