का सरल उत्तर
शंकराचार्य के अनुसार माया वह अनिर्वचनीय शक्ति है जो ब्रह्म के एकमात्र सत्य को आच्छादित करके जगत की मिथ्या प्रतीति कराती है। ज्ञान से ही माया का पर्दा हटता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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