मंदिर में भगवान को पंखा झलने की सेवा का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
पंखा सेवा: राजसी उपचार (देवता = राजा), षोडशोपचार (वायुसेवा), भक्ति = सेवा भाव ('मैं दास'), अहंकार विनाश, चँवर = शुभता-ऐश्वर्य। भगवान को आवश्यकता नहीं — भक्त का सेवा भाव ही पूजा। दक्षिण भारत 'तिरुविजय' सम्मानित।
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