मंदिर में भगवान को शयन कराने की परंपरा क्या है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
रात्रि भोग → पान → शयन श्रृंगार → फूल शय्या → शयन आरती → द्वार बंद। प्रातः: सुप्रभातम् (दक्षिण)/मंगला आरती (उत्तर)। जगन्नाथ: 'बड़ा श्रृंगार भोग' रात 11। भगवान = 24 घंटे सेवा।
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