का सरल उत्तर
भागवत (1.2.21): प्रसन्न मन और भक्तियोग से ही भगवद्-अनुभव। उपाय: 'भगवान उपस्थित हैं' का भाव, मानसी पूजा, श्वास-नाम संयोग। अष्टसात्विक भाव (रोमांच, अश्रु आदि) भक्ति के स्वतः प्रकट होने वाले चिन्ह हैं। अनुभव खोजने से नहीं — निष्काम भक्ति से आता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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