मंदिर में पूजा से आत्मज्ञान कैसे प्राप्त होता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
गीता (4.38): ज्ञान के समान कुछ पवित्र नहीं। पूजा प्रत्यक्ष आत्मज्ञान नहीं देती — यह क्रम है: पूजा → चित्त-शुद्धि → श्रवण-मनन-निदिध्यासन → आत्मज्ञान। मुण्डकोपनिषद: नियमित साधना से पाप नष्ट होकर ज्ञानामृत की प्राप्ति।
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मंदिर पूजा
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