का सरल उत्तर
कठोपनिषद: जितेंद्रिय होकर आत्मा में आत्मा का दर्शन ही आत्मिक शांति। गीता (6.20): ध्यान में चित्त-विराम से आत्मानंद। पूजा से: संसार-विराम, चिंता-अर्पण, ओम-जप, और नित्य अभ्यास — ये सब मिलकर स्थायी आत्मिक शांति देते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।