मंदिर में शयन आरती क्या होती है और कब होती है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
शयन आरती: दिन की अंतिम पूजा — देवता को रात्रि विश्राम हेतु विदा। समय: रात 9-10:30। विधि: शयन भोग (दूध/मिठाई) → दीपक आरती → शयन स्तोत्र → रात्रि वस्त्र → पट बंद। भाव: देवता = परिवार सदस्य। जगन्नाथ: बड़शिंगार,: शयन आरती कीर्तन। इसके बाद गर्भगृह बंद → प्रातः मंगल आरती तक।
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मंदिर पूजा
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