का सरल उत्तर
श्रेष्ठ स्थान: नदी तट (सर्वोत्तम), मंदिर, तुलसी वृंदावन, अपना पूजा कक्ष। नियम: एक ही स्थान नित्य — सिद्ध होता है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में जप। दक्षिण मुख वर्जित। व्यावहारिक: घर का एकांत कोना — नित्य वहीं जप करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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