विस्तृत उत्तर
जप के श्रेष्ठ स्थानों का वर्णन भगवद् गीता और मंत्र महोदधि में मिलता है:
श्रेष्ठ स्थान (क्रम में)
1नदी तट (सर्वश्रेष्ठ)
मंत्र महोदधि: नदी के किनारे बहते जल के निकट जप — शक्ति हजार गुणा। गंगा, यमुना, नर्मदा तट — सर्वोत्तम।
2मंदिर
जहाँ वर्षों से पूजा हो रही है — वहाँ दिव्य ऊर्जा संचित होती है।
3तुलसी वृंदावन के पास
घर में तुलसी के पास जप — विशेष फलदायी।
4अपना पूजा कक्ष
जहाँ नित्य पूजा होती है — वह स्थान 'सिद्ध' होता है।
5एकांत प्राकृतिक स्थान
पर्वत, वन, शांत उद्यान।
स्थान के नियम
- ▸एक ही स्थान पर नित्य जप — वह स्थान सिद्ध हो जाता है
- ▸स्वच्छ और शांत
- ▸ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में जप — श्रेष्ठ
- ▸दक्षिण दिशा में मुख करके जप — वर्जित
भगवद् गीता (6.11)
शुचौ देशे' — शुद्ध स्थान।
व्यावहारिक
शहर में, घर के एकांत कोने में — नित्य एक ही स्थान पर जप करें। वह स्थान 'जप स्थान' बन जाएगा।





