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सरल उत्तर

मंत्र जप में ऊनी आसन का क्या महत्व है?

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ऊन = विद्युत कुचालक → ऊर्जा भूमि में नहीं जाती। गीता: 'चैलाजिनकुशोत्तरम्' — कुश+मृगछाला+वस्त्र। क्रम: कुश > मृगछाला > ऊनी > रेशम > कपास। भूमि पर सीधे नहीं।

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