का सरल उत्तर
'ऋषि-छन्द-देवता न्यास बिना जप = तुच्छ फल।' 7 अंग: ऋषि (शिर), छन्द (मुख), देवता (हृदय), बीज (गुह्य), शक्ति (चरण), कीलक (नाभि), विनियोग (अंजलि)। उदाहरण: नवार्ण — ब्रह्मविष्णुरुद्र ऋषि, गायत्री छन्द, महाकाली-लक्ष्मी-सरस्वती देवता। नाम जप/चालीसा में अनिवार्य नहीं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।