का सरल उत्तर
आत्मज्ञान कैसे: मांडूक्य — 'ॐ ही सब कुछ है।' जप से कर्म नष्ट → ज्ञान का मार्ग खुलता है। 'सोऽहम्' — श्वास में ब्रह्म (वह मैं हूँ)। 'शिवोऽहम्' — अद्वैत अनुभव। भागवत: नाम जपते-जपते नाम और नामी में अंतर मिट जाता है। परम फल: 'अहं ब्रह्मास्मि।'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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