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सरल उत्तर

मंत्र जप से कर्म कैसे शुद्ध होते हैं?

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गीता (4.37): मंत्र-जप = ज्ञान-अग्नि — सभी कर्म भस्म। अजामिल (भागवत 6.1): एक 'नारायण' उच्चारण से जीवन भर के पाप नष्ट। तीन कर्म: संचित (क्षय), प्रारब्ध (तीव्रता कम), आगामी (नए पाप नहीं)। चक्र: जप → चित्त-शुद्धि → अहंकार-क्षय → कर्म-मुक्ति।

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