का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार पापी जीव का मृत्यु-भय अत्यंत तीव्र होता है — हृदय विदीर्ण होने जैसा। सौ बिच्छुओं के डंक जैसी पीड़ा, मल-मूत्र विसर्जन, हाय-हाय विलाप। पुण्यात्मा को मृत्यु के समय भय नहीं, दिव्य शांति मिलती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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