मृत्युंजय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र में क्या अंतर है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
मृत्युंजय = ऋग्वेद 7.59.12 मूल श्लोक ('ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...')। महामृत्युंजय = मूल + बीज (हौं जूं सः) + व्याहृति = तांत्रिक विस्तार, अधिक शक्तिशाली। मूल = सभी, बिना दीक्षा। बीज सहित = गुरु श्रेष्ठ। 33 अक्षर = 33 देवता। मार्कंडेय ने मृत्यु जीती।
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