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मृत्युंजय पूजा का विधान कहाँ है?

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मृत्युंजय पूजा का विधान गरुड़ पुराण के आचारखण्ड में वर्णित है। इसका सम्बन्ध महामृत्युंजय मंत्र से है, जिसका मूल ऋग्वेद और यजुर्वेद में है। यह पूजा अकाल मृत्यु-निवारण और दीर्घायु के लिए की जाती है।

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