का सरल उत्तर
'नाद ब्रह्म' — ध्वनि ही ईश्वर है। नाद योग में आहत नाद (बाहरी ध्वनि) और अनाहत नाद (भीतरी ध्वनि) का भेद है। शास्त्रीय संगीत 108 ऊर्जा-केंद्रों को सक्रिय करने का विज्ञान है। गहरे ध्यान में सुनाई देने वाला अनाहत नाद नाद-साधना का परम लक्ष्य है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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