विस्तृत उत्तर
नाद योग भारतीय दर्शन और साधना की एक अनूठी पद्धति है जिसमें ध्वनि (नाद) को ब्रह्म-प्राप्ति का साधन माना गया है।
नाद ब्रह्म — योग शास्त्र में एक गहरा सिद्धांत है — 'नाद ब्रह्म' — अर्थात ध्वनि ही ईश्वर है। इस सिद्धांत के अनुसार सृष्टि का आदि कारण ध्वनि है। उपनिषदों में कहा गया है — 'ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म' — ॐ एकाक्षर ही ब्रह्म है।
नाद के दो प्रकार — नाद योग में ध्वनि के दो प्रकार बताए गए हैं। आहत नाद — वह ध्वनि जो दो वस्तुओं के टकराने से उत्पन्न होती है, जो हम बाहरी संसार में सुनते हैं। अनाहत नाद — वह अंतर-ध्वनि जो किसी टकराव के बिना भीतर से उठती है। यही 'नाद' योग-साधना का लक्ष्य है। गहरे ध्यान में यह अनाहत नाद सुनाई देता है।
भारतीय शास्त्रीय संगीत और नाद योग — शास्त्रीय संगीत मंत्रों का एक सुधरा हुआ रूप है। भारतीय संगीत में गणितीय सूक्ष्मता के साथ यह देखा गया है कि कौन-सी ध्वनियाँ शरीर के 108 ऊर्जा-केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय कर सकती हैं। इस दृष्टि से शास्त्रीय संगीत केवल मनोरंजन नहीं, ऊर्जा-प्रबंधन और आत्मिक उन्नति का विज्ञान है।
व्यावहारिक नाद योग — गहरे ध्यान में जब मन पूरी तरह शांत होता है और बाहरी संसार से विरत होता है, तब एक सूक्ष्म ध्वनि सुनाई देती है — कभी 'ॐ' जैसी, कभी शंख जैसी, कभी वंशी जैसी। यह अनाहत नाद है जिसे शिव डमरू का स्पंदन कहते हैं।





