विस्तृत उत्तर
राग भैरवी भारतीय शास्त्रीय संगीत का सर्वाधिक भावपूर्ण और आध्यात्मिक राग माना जाता है। इसका नाम माँ भैरवी से जुड़ा है जो शक्ति और करुणा का स्वरूप हैं।
भैरवी की विशेषता — भैरवी थाट का आश्रय राग भैरवी है। इसके सभी स्वर कोमल होते हैं — कोमल ऋषभ, कोमल गंधार, कोमल धैवत, कोमल निषाद। ये कोमल स्वर ही इस राग को उसकी विशिष्ट करुणा और शांति की भावना देते हैं।
गायन समय और परंपरा — यह प्रातःकालीन राग है परंतु भारतीय संगीत की एक अनूठी परंपरा है कि किसी भी संगीत सभा को 'राग भैरवी' से ही समाप्त किया जाता है। यह इसलिए क्योंकि भैरवी एक प्रकार की विदाई और आशीर्वाद की भावना देती है।
भावनात्मक प्रभाव — भैरवी के पूर्वांग (नीचे के स्वरों) में करुण और शोक रस का अनुभव होता है, जबकि उत्तरांग में यह भाव उल्हास में बदल जाता है। यह मन की नकारात्मक भावनाओं को बाहर लाकर उन्हें शुद्ध करती है — जो मनोचिकित्सा में 'कैथार्सिस' कहलाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि — भैरवी में जो करुणा-भाव है, वह भगवान के प्रति समर्पण का स्वर है। इसीलिए भैरवी में गाए गए भजन — जैसे 'जोगी मत जा, मत जा' — आत्मा को ईश्वर के सबसे करीब ले जाते हैं।





