का सरल उत्तर
केवल सर्प का ध्यान उग्र और अनियंत्रित होता है — ध्यान सदैव 'शिव-आश्रित' (शिवलिंग पर लिपटे नाग) के रूप में करें, स्वतंत्र सर्प ध्यान कुंडलिनी को अनियंत्रित कर सकता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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