का सरल उत्तर
'नमः' से साधक स्वेच्छा से अहंकार विसर्जित करता है जैसे भैरव ने ब्रह्मा का किया था — यह साधक को भैरव की प्रचंड ऊर्जा ग्रहण के लिए शुद्ध पात्र बनाता है। यह भैरव साधना में प्रवेश का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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