का सरल उत्तर
'नमः' = 'न + मम' = 'मेरा नहीं' — यह केवल विनम्र अभिवादन नहीं बल्कि अहंकार के विसर्जन का शक्तिशाली आध्यात्मिक कार्य है। साधक अपने अहंकार, इच्छाओं और पहचान को दिव्य चेतना के समक्ष समर्पित करता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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