का सरल उत्तर
शिव महापुराण: इसकी महिमा सौ करोड़ वर्षों में नहीं कही जा सकती। स्कंद पुराण: जिसके हृदय में यह मंत्र है उसे तीर्थ, तपस्या, यज्ञ की आवश्यकता नहीं। यह वेदों का सारतत्व और मोक्षदायक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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