विस्तृत उत्तर
शिव महापुराण के अनुसार, इस महामंत्र की महिमा का वर्णन सौ करोड़ वर्षों में भी संभव नहीं है।
यह वह दिव्य मंत्र है, जिसे स्वयं भगवान शिव ने सम्पूर्ण देहधारियों के मनोरथों की सिद्धि के लिए प्रतिपादित किया।
स्कन्द पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि जिसके हृदय में 'नमः शिवाय' मंत्र निवास करता है, उसे अन्य बहुत से मंत्रों, तीर्थों, तपस्याओं अथवा यज्ञों की क्या आवश्यकता है?
यह मंत्रराज समस्त वेदों का सारतत्व है और साधक को लौकिक एवं पारलौकिक सुख प्रदान कर अंत में मोक्ष की ओर ले जाता है।





