का सरल उत्तर
नरक में दंड का कारण जीव के पापकर्म हैं — 'बिना भोगे कर्म समाप्त नहीं होता।' झूठ, हिंसा, चोरी, दान न देना, पितर-पूजा न करना — इन पापों का दंड मिलता है। दंड का उद्देश्य न्याय और आत्मशुद्धि दोनों है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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