का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण में 'बार-बार' और 'अत्यधिक' पिटाई का वर्णन है। बेहोश होने पर पुनः होश लाकर पीटा जाता है। निश्चित संख्या नहीं — पाप का दंड पूरा होने तक यह चलता रहता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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