का सरल उत्तर
नारायण सूक्त (यजुर्वेद): 'नारायण परं ब्रह्म...अन्तरबहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः।' अर्थ: नारायण ही परम ब्रह्म, परम ज्योति और परमात्मा हैं। जगत में जो कुछ भी देखा-सुना जाता है — उसके भीतर और बाहर नारायण ही व्याप्त हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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