का सरल उत्तर
नारायणास्त्र दो तरीकों से मिलता था — भगवान नारायण की कठोर तपस्या करके, या गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से योग्य गुरु से ज्ञान प्राप्त करके।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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