का सरल उत्तर
नारायणास्त्र महाभारत में अश्वत्थामा ने चलाया था — पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का बदला लेने के लिए। द्रोण ने यह अस्त्र भगवान नारायण की उपासना से प्राप्त किया और अश्वत्थामा को दिया था।
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