का सरल उत्तर
नरसी मेहता (जूनागढ़, 1414-1480 ई.) — गुजराती भक्ति साहित्य के आदि कवि। भाभी के व्यंग्य पर सात दिन शिव-उपासना की, श्रीकृष्ण की रासलीला का दर्शन हुआ। हुंडी, श्राद्ध और नानी बाई के मायरे में श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर उनकी सहायता की। 'वैष्णव जन तो' उनकी सर्वप्रसिद्ध रचना है।
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