का सरल उत्तर
कलश गिरे तो: (1) उठाएँ, शुद्ध करें। (2) पुनः जल + गंगाजल + सामग्री भरकर मंत्रपूर्वक स्थापित। (3) 'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार + गायत्री 108 + क्षमा प्रार्थना। (4) टूटे तो नया कलश। (5) व्रत जारी रखें — भंग नहीं। माँ कृपालु हैं, श्रद्धा प्रधान।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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