का सरल उत्तर
नीलकंठ लीला का संदेश: ध्यान मंथन में पहले विकार-नकारात्मकता (विष) बाहर आती है। नकारात्मकता को न उगलें (दूसरों का अहित) न निगलें (स्वयं का पतन) — शिव की भाँति कंठ में रोककर निष्प्रभावी करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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