का सरल उत्तर
महर्षि निमि का अत्यंत आज्ञाकारी और तपस्वी पुत्र कठोर तपस्या के दौरान अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ। दुर्भाग्यवश तपस्या के दौरान उसकी असमय मृत्यु हुई। इस अकाल मृत्यु से महर्षि निमि का हृदय विदीर्ण हो गया, और वे गहन शोक में डूब गए। इसी शोक से उन्होंने श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ किया।
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