का सरल उत्तर
नृसिंह प्रसाद एक प्राचीन टीका-ग्रन्थ है, जो याज्ञवल्क्य स्मृति के श्राद्ध-सम्बन्धी श्लोकों की सटीक व्याख्या करता है। इसका सबसे प्रसिद्ध भाग श्राद्धसारः है। श्राद्ध का अर्थ है पितृ-कर्म, और सार का अर्थ है सारांश। इस ग्रन्थ ने याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की है, जिसके अनुसार द्वितीया श्राद्ध से कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशू वै यानी प्रचुर पशु-धन की प्राप्ति होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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