का सरल उत्तर
न्यास विधान में साधक अपने शरीर को पवित्र मंदिर बनाता है — ऋष्यादि न्यास (सिर, मुख, हृदय पर) और षडंग न्यास (हृदय, सिर, शिखा, कवच, नेत्र, हाथों पर) किया जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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