का सरल उत्तर
'ॐ वाङ्मनस्त्वक्चक्षुः...' का अर्थ: हे प्रभु! आपकी वाणी, मन, त्वचा, नेत्र, कान, जिह्वा, घ्राण और समस्त कर्मेन्द्रियाँ यहाँ आकर सुखपूर्वक चिरकाल निवास करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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