का सरल उत्तर
पाप का फल — इसी जन्म में (दुर्भाग्य-रोग), मृत्यु के तुरंत बाद (यमलोक में लेखा), नरक में (दंड-भोग) और अगले जन्म में। 'बिना भोगे कर्म का फल करोड़ों कल्पों में भी नष्ट नहीं होता।'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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