का सरल उत्तर
सच्चे पश्चाताप, भविष्य में न दोहराने के दृढ़ संकल्प, यज्ञ, दान, तप, भजन और ईश्वर शरणागति से पाप कर्म का प्रभाव क्षीण होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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