का सरल उत्तर
आवाहन मंत्र: 'आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव। यावत्पूजां करिष्यामि तावत्त्वं सन्निधौ भव॥' — आवाहन मुद्रा से पुष्प/अक्षत अर्पित करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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