का सरल उत्तर
पर्जन्यास्त्र पर्जन्य देव की कठोर तपस्या करके उनकी कृपा से, या किसी सिद्ध गुरु की शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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