का सरल उत्तर
यह विनाश के बजाय साधक और धर्म की रक्षा तथा पुनर्जीवन का प्रतीक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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