का सरल उत्तर
पिण्डदान न होने से पिण्डज शरीर नहीं बनता, इसलिए आत्मा भूखी-प्यासी वायव्य रूप में भटकती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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