का सरल उत्तर
यहाँ पूर्ण ब्रह्मचर्य या पाशुपत व्रत का पालन अनिवार्य है। अशुद्ध अवस्था में प्रवेश, अभक्ष्य भक्षण और अहंकार का प्रदर्शन शास्त्रों में पूर्णतः निषिद्ध बताया गया है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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