का सरल उत्तर
पिप्पलाद महर्षि दधीचि के पुत्र थे जो शनि के कुयोग से पिता-वंचित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र से गिरने का श्राप दिया और देवताओं की विनती पर इस शर्त पर क्षमा किया कि शनि 16 वर्ष से पहले किसी को कष्ट नहीं देंगे। शिव के इस अवतार के स्मरण से शनि-पीड़ा दूर होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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