का सरल उत्तर
पितामह दूसरी पीढ़ी है और पितृ यात्रा के सूक्ष्म प्राणिक स्तर का प्रतिनिधि है, इसलिए उसे रुद्र स्वरूप कहा गया है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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