का सरल उत्तर
पितर 'वायु रूप' में अपने वंशजों के घर आते हैं — सूक्ष्म, अदृश्य, इंद्रियों से परे। वे चंद्रलोक से दक्षिण दिशा से घर के द्वार पर पहुँचते हैं। वायु पुराण का दर्शन। श्रद्धा से ही उनकी उपस्थिति अनुभव की जा सकती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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