का सरल उत्तर
तैत्तिरीय उपनिषद् देव और पितृ कार्यों में प्रमाद न करने का आदेश देता है, इसलिए पितृ कार्य देव कार्य जितना आवश्यक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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