का सरल उत्तर
जल अर्पण: तीन रूप — पाद्य (चरण धुलाई), अर्घ्य (हाथ धुलाई), आचमन (पेय)। विधि: तांबे पात्र में जल, दाहिने हाथ से, 'इदं पाद्यं/अर्घ्यं समर्पयामि' बोलते हुए। सूर्य: प्रातः पूर्व मुख, पतली धारा, गायत्री मंत्र।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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