प्रपितामह को आदित्य स्वरूप क्यों माना जाता है?
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सरल उत्तर
प्रपितामह तीसरी पीढ़ी है और पितृ यात्रा की उच्चतम प्रकाशमय, मोक्षोन्मुख अवस्था का प्रतिनिधि है, इसलिए आदित्य स्वरूप है।
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